Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 45.12

प्रावृताविषुजालेन राघवौ कङ्कपत्रिणा ।
एष रोषपरीतात्मा नयामि यमसादनम् ।। ६.४५.१२ ।।।।

पूरा अध्याय