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वाल्मीकि रामायण 44.15

शस्त्रपुष्पोपहारा च तत्रासीद्युद्धमेदिनी ।
दुर्ज्ञेया दुर्निवेशा च शोणितास्रावकर्दमा ।। ६.४४.१५ ।।।।

पूरा अध्याय