ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 4343.9वाल्मीकि रामायण 43.9तपनेन गजः सार्धं राक्षसेन महाबलः । निकुम्भेन महातेजा नीलो ऽपि समयुद्ध्यत ।। ६.४३.९ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय