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वाल्मीकि रामायण 43.3

निर्ययू राक्षसव्याघ्रा नादयन्तो दिशो दश ।
राक्षसा भीमकर्माणो रावणस्य जयैषिणः ।। ६.४३.३ ।।।।

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