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वाल्मीकि रामायण 41.96

राक्षसा विस्मयं जग्मुस्त्रासं जग्मुस्तथा ऽपरे ।
अपरे समरोद्धर्षाद्धर्षमेव प्रपेदिरे ।। ६.४१.९६ ।।।।

पूरा अध्याय