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वाल्मीकि रामायण 41.89

भङ्क्त्वा प्रासादशिखरं नाम विश्राव्य चात्मनः ।
विनद्य सुमहानादमुत्पपात विहायसम् ।। ६.४१.८९ ।।।।

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