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वाल्मीकि रामायण 41.82

ततः स रोषताम्राक्षः शशास सचिवांस्तदा ।
गृह्यतामेष दुर्मेधा वध्यतामिति चासकृत् ।। ६.४१.८२ ।।।।

पूरा अध्याय