ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 4141.77वाल्मीकि रामायण 41.77आह त्वां राघवो रामः कौसल्यानन्दवर्धनः । निष्पत्य प्रतियुद्ध्यस्व नृशंस पुरुषो भव ।। ६.४१.७७ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय