ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 4141.75वाल्मीकि रामायण 41.75तद्रामवचनं सर्वमन्यूनाधिकमुत्तमम् । सामात्यं श्रावयामास निवेद्यात्मानमात्मना ।। ६.४१.७५ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय