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वाल्मीकि रामायण 41.21

क्षिप्रमद्य दुराधर्षां लङ्कां रावणपालिताम् ।
अभियाम जवेनैव सर्वतो हरिभिर्वृताः ।। ६.४१.२१ ।।।।

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