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वाल्मीकि रामायण 40.5

वीलजीमूतसंकाशं हेमसंचादिताम्बरम् ।
ऐरावतविषाणाग्रैरुत्कृष्टकिणवक्षसम् ।। ६-४०-५।।

पूरा अध्याय