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वाल्मीकि रामायण 40.2

स्थित्वा मुहूर्तं तत्रैव दिशो दश विलोकयन् ।
त्रिख़ूटशिखरे रम्ये निर्मितां विश्वकर्मणा ।। ६-४०-२।।

पूरा अध्याय