ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 3838.7वाल्मीकि रामायण 38.7एको हि कुरुते पापम् काल पाज़ वज़म् गतः । नीचेन आत्म अपचारेण कुलम् तेन विनज़्यति ।। ६-३८-७।।पिछलाअगलापूरा अध्याय