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वाल्मीकि रामायण 37.5

कार्य सिद्धिम् पुरस् क्Rत्य मन्त्रयध्वम् विनिर्णये ।
नित्यम् सम्निहितो ह्य् अत्र रावणो राक्षस अधिपः ॥६-३७-५॥

पूरा अध्याय