ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 3434.5वाल्मीकि रामायण 34.5एवम् ब्रुवाणाम् ताम् सीता सरमाम् पुनर् अब्रवीत् । मधुरम् श्लक्ष्णया वाचा पूर्व शोक अभिपन्नया ॥६-३४-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय