Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 31.9

परिणीय च सर्वत्र नीतो अहम् राम सम्सदम् ।
रुधिर आदिग्ध सर्व अन्गो विह्वलः चलित इन्द्रियः ॥६-३०-९॥

पूरा अध्याय