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वाल्मीकि रामायण 3.22

शैल अग्रे रचिता दुर्गा सा पूर् देव पुर उपमा ।
वाजि वारण सम्पूर्णा लंका परम दुर्जया ॥६-३-२२॥

पूरा अध्याय