ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 33.10वाल्मीकि रामायण 3.10प्रहृष्टा मुदिता लंका मत्त द्विप समाकुला । महती रथ सम्पूर्णा रक्षो गण समाकुला ॥६-३-१०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय