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वाल्मीकि रामायण 28.31

दुर्गाम् पर्वत दुर्गस्थाम् प्रधानैः सह यूथपैः ।
यस्य एषा कान्चनी माला शोभते शत पुष्करा ॥६-२८-३१॥

पूरा अध्याय