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वाल्मीकि रामायण 28.29

सर्व शाखा मृग इन्द्राणाम् भर्तारम् अपराजितम् ।
तेजसा यशसा बुद्ध्या ज्ञानेन अभिजनेन च ॥६-२८-२९॥

पूरा अध्याय