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वाल्मीकि रामायण 27.22

यो राजा पर्वत इन्द्राणाम् बहु किम्नर सेविनाम् ।
विहार सुखदो नित्यम् भ्रातुस् ते राक्षस अधिप ॥६-२७-२२॥

पूरा अध्याय