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वाल्मीकि रामायण 26.5

आरुरोह ततः श्रीमान् प्रासादम् हिम पाण्डुरम् ।
बहु ताल समुत्सेधम् रावणो अथ दिदृक्षया ॥६-२६-५॥

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