Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 26.40

घोरः शाखा मृग इन्द्राणाम् सम्ग्रामम् अभिकान्क्षताम् ।
एष पर्वतम् अध्यास्ते पारियात्रम् अनुत्तमम् ॥६-२६-४०॥

पूरा अध्याय