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वाल्मीकि रामायण 25.36

शुकस्य वचनम् श्रुत्वा रावणो वाक्य मब्रवीत् ।
रोषसम्रक्तनयनो निर्दहन्निव चक्षुषा ॥६-२४-३६॥

पूरा अध्याय