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वाल्मीकि रामायण 25.15

तिष्ठेद्वानरवाहिन्या वानरौघसमावृतः ।
आशिर्तो दक्षिणम् पार्श्वमृषभो नाम वानरः ॥६-२४-१५॥

पूरा अध्याय