Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 24.38

कदा समभिधानन्ति मामका राघवम् शराः ।
वसन्ते पुष्पितम् मत्ता भ्रमरा इव पादपम् ॥६-२४-३८॥

पूरा अध्याय