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वाल्मीकि रामायण 24.19

पश्चार्धमिव लोकस्य प्रचेतास्तेजपा वृतः ।
सुविभक्तमहाव्यूहा महावानररक्षिता ॥६-२४-१९॥

पूरा अध्याय