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वाल्मीकि रामायण 22.5

ब्राह्मेणास्त्रेण सम्योज्य ब्रह्मदण्डनिभम् शरम् ।
सम्योज्य धनुषि श्रे ष्ठे विचकर्ष महाबलः ॥६-२२-५॥

पूरा अध्याय