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वाल्मीकि रामायण 21.32

आघूर्णित तरन्ग ओघः सम्ब्भ्रान्त उरग राक्षसः ।
उद्वर्तित महाग्राहः सम्वृत्तः सलिल आशयः ॥६-२१-३२॥

पूरा अध्याय