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वाल्मीकि रामायण 20.7

तव दूता महाराज क्षिप्रमर्हन्ति वेदितुम् ।
उपप्रदानम् सान्त्वम् वा भेदो वात्र प्रयुज्यताम् ॥६-२०-७॥

पूरा अध्याय