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वाल्मीकि रामायण 19.34

एवं विभीषणेनोक्तो राक्षसेन विपश्चिता ।
आजगामाथ सुग्रीवो यत्र रामः सलक्ष्मणः ।। ६.१९.३४ ।।।।

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