ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 1818.20वाल्मीकि रामायण 18.20रसातलम् वा प्रविशेत्पातालम् वापि रावणः । पितामहसकाशम् वा न मे जीवन्विमोक्ष्यते ॥६-१९-२०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय