ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 1717.65वाल्मीकि रामायण 17.65देश काल उपपन्नम् च कार्यम् कार्यविदाम् वर । सफलम् कुरुते क्षिप्रम् प्रयोगेण अभिसम्हितम् ॥६-१७-६५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय