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वाल्मीकि रामायण 17.28

राक्षसो जिह्मया बुद्ध्या सम्दिष्टो अयम् उपस्थितः ।
प्रहर्तुम् मायया चन्नो विश्वस्ते त्वयि राघव ॥६-१७-२८॥

पूरा अध्याय