Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 17.24

मित्राटवीबलम् चैव मौलभृत्यबलम् तथा ।
सर्वमेतद्बलम् ग्राह्यम् वर्जयित्वा द्विषद्बलम् ॥६-१७-२४॥

पूरा अध्याय