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वाल्मीकि रामायण 16.25

काल अभिपन्ना सीदन्ति यथा वालुक सेतवः ।
तनर्षयतु यच्चोक्तम् गुरुत्वाद्धितमिच्चता ॥६-१६-२५॥

पूरा अध्याय