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वाल्मीकि रामायण 14.22

परस्य वीर्यम् स्वबलम् च बुद्ध्वा ।
स्थानम् क्षयम् चैव तथैव वृद्धिम् ।तथा स्वपक्षे प्यनुमृश्य बुद्ध्या ।वद्त् क्षमम् स्वामिहितम् स मन्त्री ॥६-१४-२२॥

पूरा अध्याय