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वाल्मीकि रामायण 14.19

यावद्धि केशग्रहणात्सुहृद्भिः ।
समेत्य सर्वैः परिपूर्णकामैः ।निगृह्य राजा परिरक्षितव्यो ।भूतैर्यथा भीमबलैर्गृहीअः ॥६-१४-१९॥

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