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वाल्मीकि रामायण 13.2

यः खल्वपि वनम् प्राप्य मृगव्यालनिषेवितम् ।
न पिबेन्मधु सम्प्राप्य स नरो बालिशो ध्रुवम् ॥६-१३-२॥

पूरा अध्याय