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वाल्मीकि रामायण 128.39

एवमुक्तो हनुमता भरतो भ्रातृवत्सलः ।
पपात सहसा हृष्टो हर्षान्मोहं जगाम ह ।। ६.१२८.४० ।।

पूरा अध्याय