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वाल्मीकि रामायण 128.28

क्रोशमात्रे त्वयोध्यायाश्चीरकृष्णाजिनाम्बरम् ।
ददर्श भरतं दीनं कृशमाश्रमवासिनम् ।। ६.१२८.२९ ।।

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