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वाल्मीकि रामायण 126.3

कैलासशिखराकारे त्रिकूटशिखरे स्थिताम् ।
लङ्कामीक्षस्व वैदेहि निर्मितां विश्वकर्मणा ।। ६.१२६.३ ।।

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