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वाल्मीकि रामायण 124.21

अनुजानीहि मां सौम्य पूजितो ऽस्मि विभीषण ।
मन्युर्न खलु कर्तव्यस्त्वरितं त्वा ऽनुमानये ।। ६.१२४.२४ ।।

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