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वाल्मीकि रामायण 124.13

वस तावदिह प्राज्ञ यद्यस्ति मयि सौहृदभ् ।
लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा वैदेह्या चापि भार्यया ।। ६.१२४.१५ ।।

पूरा अध्याय