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वाल्मीकि रामायण 122.27

स तथेति महाराजो राममुक्त्वा कृताञ्जलिम् ।
लक्ष्मणं च परिष्वज्य पुनर्वाक्यमुवाच ह ।। ६.१२२.२७ ।।

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