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वाल्मीकि रामायण 122.21

अनुरक्तेन बलिना शुचिना धर्मचारिणा ।
इच्छामि त्वामहं द्रष्टुं भरतेन समागतम् ।। ६.१२२.२१ ।।

पूरा अध्याय