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वाल्मीकि रामायण 122.19

सिद्धार्था खलु कौसल्या या त्वां राम गृहं गतम् ।
वनान्निवृत्तं संहृष्टा द्रक्ष्यत्यरिनिषूदन ।। ६.१२२.१९ ।।

पूरा अध्याय