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वाल्मीकि रामायण 121.21

विशुद्धा त्रिषु लोकेषु मैथिली जनकात्मजा ।
न हि हातुमियं शक्या कीर्तिरात्मवता यथा ।। ६.१२१.२१ ।।

पूरा अध्याय