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वाल्मीकि रामायण 120.33

ये त्वां देवं ध्रुवं भक्ताः पुराणं पुरुषोत्तमम् ।
प्राप्नुवन्ति सदा कामानिह लोके परत्र च ।। ६.१२०.३३ ।।

पूरा अध्याय