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वाल्मीकि रामायण 120.30

तदिदं नः कृतं कार्यं त्वया धर्मभृतां वर ।
निहतो रावणो राम प्रहृष्टो दिवमाक्रम ।। ६.१२०.३० ।।

पूरा अध्याय